1. निम्नलिखित में से सम संख्या कौन सी है - A) 765489 B) 445566 C) 880001 D) 976541 ANSWER= (B) 445566 Check Answer 2. निम्नलिखित में से चार अंको की सबसे बड़ी संख्या कौन सी है A) 9999 B) 1000 C) 1111 D) 9998 ANSWER= (A) 9999 Check Answer 2. निम्नलिखित में से चार अंको की सबसे बड़ी संख्या कौन सी है A) 9999 B) 1000 C) 1111 D) 9998 ANSWER= (A) 9999 Check Answer
Class 8th chapter 1 परिमेय संख्या
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वे संख्याएं जिन्हें P/Q के रूप में व्यक्त किया जा सके, जहां P तथा Q पूर्णांक संख्याएं और Q=0 नहीं हो उन्हें परिमेय संख्या कहते हैं ।
परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएं -
(1) योग का नियम - परिमेय संख्याओं को LCM लेकर जोड़ा या घटाया जाता है इसमें पूर्णांक संख्या के नियमों को ध्यान में रखा जाता है ।
(2) गुणन का नियम - परिमेय संख्याओं का गुणा करते समय अंश का गुणा अंश से हर का गुणा हर से किया जाता है ।
परिमेय संख्याओं के गुणधर्म -
परिमेय संख्याएं योग, व्यकलन तथा गुणन के अंतर्गत संवृत होती है अर्थात उपर्युक्त संक्रियाओं को करने पर परिमेय संख्या ही प्राप्त होती है परंतु परिमेय संख्याओं का भाग करने पर सदैव एक परिमेय संख्या प्राप्त हो यह आवश्यक नहीं अतः परिमेय संख्याएं भाग के अंतर्गत संवृत नहीं है ।
परिमेय संख्याओं का योग क्रम विनिमय नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का व्यकलन क्रम विनिमय नियम का पालन नहीं करता है ।
परिमेय संख्याओं का गुणन क्रम विनिमय नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का भाग क्रम विनिमय नियम का पालन नहीं करता है ।
परिमेय संख्याओं का योग साहचर्य नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का व्यकलन साहचर्य नियम का पालन नहीं करता है ।
परिमेय संख्याओं का गुणन साहचर्य नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का भाग साहचर्य नियम का पालन नहीं करता है ।
शून्य को किसी परिमेय संख्या के साथ जोड़ने या घटाने पर वही संख्या प्राप्त होती है ।
परिमेय संख्याओं का गुणात्मक तत्समक 1 होता है ।
जब दो संख्याओं का योग शून्य हो तो वे दोनों संख्या एक दूसरे की योज्य प्रतिलोम होती है ।
जब दो संख्याओं का गुणनफल 1 हो तो वे दोनों संख्याएं एक दूसरे की गुणात्मक प्रतिलोम होती है ।
परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएं -
(1) योग का नियम - परिमेय संख्याओं को LCM लेकर जोड़ा या घटाया जाता है इसमें पूर्णांक संख्या के नियमों को ध्यान में रखा जाता है ।
(2) गुणन का नियम - परिमेय संख्याओं का गुणा करते समय अंश का गुणा अंश से हर का गुणा हर से किया जाता है ।
परिमेय संख्याओं के गुणधर्म -
परिमेय संख्याएं योग, व्यकलन तथा गुणन के अंतर्गत संवृत होती है अर्थात उपर्युक्त संक्रियाओं को करने पर परिमेय संख्या ही प्राप्त होती है परंतु परिमेय संख्याओं का भाग करने पर सदैव एक परिमेय संख्या प्राप्त हो यह आवश्यक नहीं अतः परिमेय संख्याएं भाग के अंतर्गत संवृत नहीं है ।
परिमेय संख्याओं का योग क्रम विनिमय नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का व्यकलन क्रम विनिमय नियम का पालन नहीं करता है ।
परिमेय संख्याओं का गुणन क्रम विनिमय नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का भाग क्रम विनिमय नियम का पालन नहीं करता है ।
परिमेय संख्याओं का योग साहचर्य नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का व्यकलन साहचर्य नियम का पालन नहीं करता है ।
परिमेय संख्याओं का गुणन साहचर्य नियम का पालन करता है ।
परिमेय संख्याओं का भाग साहचर्य नियम का पालन नहीं करता है ।
शून्य को किसी परिमेय संख्या के साथ जोड़ने या घटाने पर वही संख्या प्राप्त होती है ।
परिमेय संख्याओं का गुणात्मक तत्समक 1 होता है ।
जब दो संख्याओं का योग शून्य हो तो वे दोनों संख्या एक दूसरे की योज्य प्रतिलोम होती है ।
जब दो संख्याओं का गुणनफल 1 हो तो वे दोनों संख्याएं एक दूसरे की गुणात्मक प्रतिलोम होती है ।
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Paremay sakes
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